Story of rani lakshmi bai in hindi. Rani Laxmi Bai history in hindi 2019-01-16

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Rani Lakshmi Bai Essay in Hindi

story of rani lakshmi bai in hindi

घिरी अब रानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार, किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार, घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये अवार, रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार। घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी, मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी, अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी, हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी, दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी, होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी, हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी। तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। झांसी की रानी के बारे में पढ़कर आज हमें यह अहसास हुआ कि हमारे नेताओं ने अंग्रेज़ों के साथ मिलकर सिर्फ सत्ता हस्तांतरण करा कर और विदेशी 125 कम्पनियों को लाईसेंस दे कर हमारे जांबाज क्रान्तिकारियों जिन्होंने अंग्रेजों की बनाई हुई व्यवस्था से लड़ते लड़ते अपनी जान तक निछावर कर दी के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा है और आज तक विदेशी कम्पनियों को ला कर मारती चली आ रही है हमारे क्रान्तिकारियों को तभी सच्ची श्रद्धांजलि होगी जब हम सब भारतवासी मिल कर सरकार को इतना मजबूर कर दे कि वो विदेशी कम्पनियों को भारत से बाहर करें अन्यथा तरक्की के नाम पर हमारा देश गड्ढे में धसता चला जायेगा और हमारे क्रान्तिकारियों को सच्ची श्रद्धांजलि नहीं मिल पायेगी आप लोग किसी एक क्रांतिकारी के बारें में अपनी जगह रख कर सोचिए आप के दिल में देश के प्रति सच्चा प्यार जाग्रत हो जायेगा पूरे विश्व में जितनी अपार सम्पदा हमारे देश में है उतनी सम्पदा किसी भी देश में नहीं है फिर हम भारतवासी क्यों गरीबी की जिन्दगी जिएं आज से हमें अगर अपने भारत को बचाना है तो हम भारतवासी लोग प्ररण करे कि हम किसी विदेशी कम्पनियों का उत्पादित माल नहीं खरीदेंगे और अपनी खनिज सम्पदा पर विदेशी कम्पनियों का अधिकार है उसे सरकार को मजबूर करा कर उसे खत्म करवायेंगे :-जै हिन्द जै भारत देश।. और आज भी वह करोड़ों लोगों की प्रेरणा है. The Indians lost the First War of Independence. As per the sources, in the letter, she had mentioned about the deceitful tricks of Lord Dalhousie in annexing her sovereign State of Jhansi. रानी ने तोपों से युद्ध करने की रणनीति बनाते हुए कड़कबिजली, घनगर्जन, भवानीशंकर आदि तोपों को किले पर अपने विश्वासपात्र तोपची के नेतृत्व में लगा दिया. रानी लक्ष्मीबाई 'रानी लक्ष्मीबाई' का जन्म 19 नवंबर 1835 को काशी में हुआ था। इनके पिता का नाम मोरोपंत ताम्बे था। इनकी माता का नाम भागीरथी बाई था। लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से उन्हें मनु कहा जाता था। रानी लक्ष्मीबाई का विवाह 1842 में गंगाधर राव से हुआ। गंगाधर राव झांसी के राजा थे। 1851 में उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, किन्तु चार माह पश्चात उस बालक का निधन हो गया। राजा गंगाधर राव इस सदमे को बर्दाश्त न कर सके और लम्बी अस्वस्थता के बाद 21 नवंबर 1853 को उनका निधन हो गया। झांसी 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख केन्द्र बन गया था। रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की सुरक्षा को सुदृढ़ करना शुरू कर दिया और एक स्वयंसेवक सेना का गठन प्रारम्भ किया। इस सेना में महिलाओं की भर्ती भी की गयी और उन्हें युद्ध प्रशिक्षण भी दिया गया। साधारण जनता ने भी इस विद्रोह में सहयोग दिया। 1857 में पड़ोसी राज्य ओरछा तथा दतिया के राजाओं ने झांसी पर आक्रमण कर दिया। रानी ने सफलता पूर्वक इसे विफल कर दिया। 1858 के मार्च माह में ब्रितानी सेना ने झांसी शहर को घेर लिया। दो हफ़्तों की लड़ाई के बाद ब्रितानी सेना ने शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया। परन्तु रानी, अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव के साथ अंग्रेज़ो से बच कर भागने में सफल हो गयी। रानी झाँसी से भाग कर कालपी पहुँची और तात्या टोपे से मिली। 18 जून, 1858 को रानी लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त की। अंग्रेज़ों के विरुद्ध रणयज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरि माना जाता है। 1857 में उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सूत्रपात किया था। अपने शौर्य से उन्होंने अंग्रेज़ों के दाँत खट्टे कर दिए थे। रानी लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं। उन्होंने न केवल भारत की बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया। उनका जीवन स्वयं में वीरोचित गुणों से भरपूर, अमर देशभक्ति और बलिदान की एक अनुपम गाथा है।.

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Rani Laxmi Bai History in Hindi

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She fought bravely and heroically. And then you will learn sword fighting. Lakshmi Bai stood against him. परन्तु रानी, दामोदर राव के साथ अंग्रेजों से बचने में सफल हो गयी. India will never forget her name.

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Rani Laxmi Bai History in Hindi

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She adopted a son and declared herself independent. Jhansi was again invaded in 1857. Her mother died when she was four years old. उनके पुत्र की मृत्यु 3 माह की अवस्था में हीं हो गई. महारानी की विजय हुई, लेकिन 18 जून को ह्यूरोज स्वयं युद्धभूमि में आ डटा. उनके पति राजा गंगाधर राव यह सब देखकर प्रसन्न रहते.

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Rani Laxmi Bai Biography in Hindi

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Here is the video of the ballad, which was sung by the famous classical Indian singer, in the Parliament on the celebration of 150 years of the First Freedom Movement of India. मनु जब मात्र चार साल की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया. मुसीबतों का पहाड़ पुत्र वियोग के आघात से दु:खी राजा ने 21 नवंबर, 1853 को प्राण त्याग दिए. अश्वारोहण और शस्त्र-संधान में निपुण महारानी लक्ष्मीबाई ने झांसी किले के अंदर ही महिला-सेना खड़ी कर ली थी, जिसका संचालन वह स्वयं मर्दानी पोशाक पहनकर करती थीं. रानी रणचंडी का साक्षात रूप रखे पीठ पर दत्तक पुत्र दामोदर राव को बांधे भयंकर युद्ध करती रहीं. अंग्रेजों ने अपनी कुटिल नीति के चलते झांसी पर चढ़ाई कर दी.


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Manikarnika Full Story in Hindi

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The Rani rose against Naya Khan and the Brit­ish. रानी लक्ष्मीबाई Rani Lakshmi Bai ने दामोदर राव को रामचंद्र देशमुख को सौंप दिया. She filled the heart of her soldiers with the spirit of heroism. घायल होते हुए भी उन्होंने उस अंग्रेज सैनिक का काम तमाम कर दिया और फिर अपने प्राण त्याग दिए. Rani Lakshmibai was accustomed to riding on horseback accompanied by a small escort between the palace and the temple although sometimes she was carried by palanquin.

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The Story of Rani Lakshmibai

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इस सेना में महिलाओं की भर्ती भी की गयी और उन्हें युद्ध प्रशिक्षण भी दिया गया. She sold her ornaments to dispose him off. उन्होंने अपनी सेना में महिलाओं की भर्ती की थी. पहले पुत्र की असमय मृत्यु और फिर माँ न बनने का दुःख सहने के बावजूद यह वीरांगना अपने कर्तव्य पथ से एक पल के लिए भी नहीं डिगी. She became widow after two years of her marriage. She refused to obey the orders of Governor-Gen- eral.

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Rani Lakshmi Bai Essay in Hindi

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Her father worked for a court Peshwa of Bithoor district. Lakshmibai thinking — I will have to be strong and take control of Jhansi or else the citizens will get affected. Let us read her story- 1 Father — Bhagirathi, our little girl Manikarnika is looking so beautiful. दो हफ़्तों की लडाई के बाद अंग्रेजी सेना ने शहर पर कब्जा कर लिया. यदि आपको इसमें कोई भी खामी लगे या आप अपना कोई सुझाव देना चाहें तो आप नीचे comment ज़रूर कीजिये. She wished to adopt a son.


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Hindi Essay

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Man 1 — We are always in your support our Queen! And then Woman 1 — Did you hear the news? Rani Lakshmi Bai Essay in Hindi अर्थात इस article में आपके लिए रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी हिन्दी में दी गयी है. रानी लक्ष्मीबाई Rani Lakshmi Bai ना सिर्फ एक महान नाम है बल्कि वह एक आदर्श हैं उन सभी महिलाओं के लिए जो खुद को बहादुर मानती हैं और उनके लिए भी एक आदर्श हैं जो महिलाएं सोचती है कि वह महिलाएं हैं तो कुछ नहीं कर सकती. At the time of her death, she was reportedly 29 years old. In fact, the image published on Postcard was not of the Rani Lakshmibai but was of the Sultan Jehan Begum, the queen of Bhopal, and since then, that picture has been used by various publications as the picture of Rani of Jhansi, Lakhsmibai. Woman 2 — Oh no! Her tales of fight and valour will transcend generations. रानी लक्ष्मीबाई Rani Lakshmi Bai ने कम उम्र में ही साबित कर दिया कि वह न सिर्फ बेहतरीन सेनापति हैं बल्कि कुशल प्रशासक भी हैं.


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